मिर्गी क्या होता है? मिर्गी कितने प्रकार की होती है, मिर्गी कैसे आती है, मिर्गी के लक्षण, उपचार, कारण और इलाज क्या है?

आज हम जानेंगे मिर्गी के लक्षण और इलाज की पूरी जानकारी (Epilepsy Disease in Hindi) के बारे में क्योंकि यह शायद भगवान का जीवन चक्र ही है कि उन्होंने धरती पर इंसान भेजा तो कुछ बीमारियों को भी बनाया, ताकि इंसानों का मरना और जीना लगा रहे। दुनिया में कई बीमारियां है जिसमें से कुछ बीमारियां इतनी गंभीर होती हैं कि उनसे ग्रसित व्यक्ति की मौत सबसे गंदे तरीके से होती है और कुछ बीमारियां ऐसी होती हैं जो सामान्य तो होती है परंतु लोग उस बीमारी से ग्रसित लोगों को घृणा की नजरों से देखते हैं।

मिर्गी एक ऐसी बीमारी है जो आदमी को सीधा जमीन पर ही लिटा देती है, क्योंकि इसमें आदमी अचानक से ही जमीन पर गिर कर के मुंह से फेचकुर बहाने लगता है। आज के इस लेख में जानेंगे कि Epilepsy Kya Hota Hai, मिर्गी के लक्षण, मिर्गी के उपचार, मिर्गी के कारण, मिर्गी का इलाज, Epilepsy in Hindi, मिर्गी के नुकसान, Epilepsy meaning in Hindi, आदि की जानकारीयां पूरा डिटेल्स में जानने को मिलेगा, इसलिये इस लेख को सुरू से अंत तक जरूर पढे़ं।

मिर्गी क्या होता है? – What is Epilepsy Disease in Hindi

Epilepsy Disease In Hindi
Epilepsy Disease In Hindi

मेडिकल साइंस की लैंग्वेज में मिर्गी को क्रॉनिक डिसऑर्डर की कैटेगरी में रखा गया है। यह बीमारी आज से ही नहीं है बल्कि मिर्गी बीमारी का इतिहास काफी पुराना है। जो भी व्यक्ति मिर्गी की बीमारी से परेशान होता है, उसे अचानक से ही दौरा पड़ने लगता है और यह दौरा कभी भी आ सकता है। दौरा पड़ने पर अधिकतर मिर्गी के पेशेंट जमीन पर गिर जाते हैं और उनके हाथ पैर कांपने लगते हैं।

ऐसा लगता है जैसे अभी ही उनकी जान निकलने वाली है। मिर्गी को अंग्रेजी भाषा में एपिलेप्सी कहा जाता है। इस प्रकार से आप यह स्पष्ट तौर पर समझ ले की एपिलेप्सी और मिर्गी दोनों एक ही है। कभी-कभी किसी पेशेंट को तो मिर्गी के ऐसे लक्षण होते हैं जिसके बारे में अन्य लोगों को जानकारी ही नहीं होती है। हमारे समाज में ऐसे कई लोग हैं जो मिर्गी की समस्या से परेशान व्यक्ति को घृणा की नजरों से देखते हैं और उसके बारे में उल्टी-सीधी बातें करते हैं।

मिर्गी शब्द का अर्थ क्या होता है? – Epilepsy Meaning in Hindi

हमारे दिमाग में जब कुछ असामान्य हरकते होने लगती है तो इसकी वजह से हमारे दिमाग में अचानक से दौरा पड़ने लगता है और ऐसी अवस्था में व्यक्ति अचानक से जमीन पर गिर जाता है और उसका शरीर अकड़ जाता है। इसी अवस्था को मिर्गी कहकर बुलाया जाता है।

मिर्गी कितने प्रकार की होती है? – Types of Epilepsy in Hindi

हर साल 17 नवंबर को पूरी दुनिया भर में वर्ल्ड एपिलेप्सी डे मनाया जाता है। बात करे अगर मिर्गी के प्रकार की तो इसके मुख्य तौर पर 2 प्रकार हैं, जो निम्नानुसार हैं।

1. जनरलाइज्ड एपिलेप्सी

इसे हिंदी में सामान्यकृत दौरा कहा जाता है। बता दे कि इस प्रकार का दौरा व्यक्ति को तब आता है जब उसके दिमाग में जो दोनों ऑटो पार्ट् है, उन दोनों ही पार्ट् में एक साथ एपिलेप्सी यानी की मिर्गी से रिलेटेड कुछ हलचल चालू हो जाती है और जब दौरा तेज हो जाता है, तो आदमी की सुध बुध खो जाती है।

2. फोकल एपिलेप्सी

इस प्रकार की मिर्गी के दौरे में व्यक्ति की सुध बुध को ज्यादा कुछ भी नुकसान नहीं होता है। इस प्रकार के दौरे में व्यक्ति के सूंघने की क्षमता में या फिर स्वास्थ्य की क्षमता में थोड़े बदलाव आते हैं, साथ ही उसे चक्कर भी आते हैं। इसके अलावा उसे अपनी बॉडी के अंगों में ऐसा लगता है जैसे उसे झनझनाहट महसूस हो रही है।

मिर्गी के लक्षण – Symptoms of Epilepsy in Hindi

नीचे आपको मिर्गी आने पर कौन से लक्षण दिखाई देते हैं। इसकी जानकारी दी जा रही है। हालांकि यह लक्षण मिर्गी के ही हो, यह आवश्यक नहीं है।

  • कुछ देर के लिए असमंजस की स्थिति
  • पूरी बॉडी ऐठना
  • होश गवा देना
  • दिमाग में अत्याधिक टेंशन बढ़ना
  • अचानक से जमीन पर गिर जाना
  • मुंह से झाग निकलना

मिर्गी कैसे आती है?

दिमाग में टेंशन होने के कारण व्यक्ति को मिर्गी के दौरे आने लगते हैं जिससे उसका शरीर अनबैलेंस हो जाता है और वह जमीन पर गिर पड़ता है।

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मिर्गी होने का कारण – Causes of Epilepsy in Hindi

कोई भी प्रॉब्लम इंसानों को तभी होती है, जब कुछ ना कुछ कारण उसके पीछे होता है। एपिलेप्सी यानी कि मिर्गी होने के संभावित कारण कौन से हो सकते हैं। वह नीचे आपको बताए गए हैं।

  • जेनेटिक असर
  • सिर में चोट
  • ब्रेन कंडीशन
  • इंफेक्शन वाली बीमारी
  • प्रीनेटल इंजरी
  • डेवलपमेंट डिसऑर्डर

मिर्गी से बचाव कैसे करें? – How to prevent epilepsy in Hindi

मिर्गी की प्रॉब्लम अपने आप ही नहीं हो जाती है बल्कि यह इंसानों की कुछ गलतियों के कारण ही होती है। कुछ संभावित बचाव नीचे हम आपको दे रहे हैं, जिसे आपको एपिलेप्सी से बचने के लिए करना चाहिए।

  • दारू ना पिए।
  • गुटका ना खाएं।
  • ज्यादा टेंशन ना लें।
  • नशे वाली दवा ज्यादा ना खाएं।
  • हमेशा सोच विचार ना करें।

किसी भी व्यक्ति को ऐसी अवस्था में तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए, जब उसे यह लगता है कि उसे मिर्गी के लक्षण महसूस हो रहे हैं अथवा उसे मिर्गी का दौरा पड़ रहा है। मिर्गी के दौरे इंसानों की जान के लिए खतरनाक होते हैं। इसलिए समय रहते उसका इलाज किया जाना आवश्यक होता है। नीचे एपिलेप्सी की जांच कैसे की जाती है, इसके लिए इस्तेमाल की जाने वाली प्रक्रिया के बारे में आपको बताया गया है।

  • इलेक्ट्रोइन्सेफलोग्राम
  • इमेजिंग टेस्ट ट्यूमर
  • सीटी स्कैन
  • एमआरआई
  • पॉसिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी

क्या टेंशन लेने से मिर्गी हो सकती है? – can stress cause epilepsy

मिर्गी की प्रॉब्लम का सबसे ज्यादा असर दिमाग की नसों में या फिर मांसपेशियों में ही होता है।‌वैसे तो यह चालू दिमाग से ही होता है परंतु इसके कारण बॉडी में कई प्रकार के बदलाव होते हैं। यह एक ऐसी समस्या होती है जो अचानक से ही व्यक्ति के अंदर दौरा पैदा करने का काम करती है और यह बात सत्य है की अत्याधिक टेंशन जो व्यक्ति लेता है या फिर जो व्यक्ति किसी न किसी चीज के बारे में लगातार सोचता रहता है,

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उसके दिमाग की मांसपेशियो पर जोर पड़ता है और कहीं ना कहीं यह मिर्गी होने का कारण बन सकती है। बता दें कि ब्रिटिश एपिलेप्सी एसोसिएशन ने मिर्गी के ऊपर एक रिसर्च की थी, जिसमें उन्होंने यह पाया था कि अधिकतर जो भी लोग मिर्गी से परेशान थे, उनमें अधिक टेंशन लेने की समस्या देखी गई थी।

मिर्गी का इलाज क्या है? – Treatment of Epilepsy in Hindi

अगर आपको एपिलेप्सी की समस्या है, तो डॉक्टर सबसे पहले आपकी बॉडी का चेकअप करते हैं और उसके बाद एपिलेप्सी की समस्या की जड़ तक जाने के लिए वह कुछ टेस्ट करते हैं, जो नीचे बताए अनुसार हैं।

  • न्यूरोलॉजिकल एक्जामिनेशन
  • ब्लड टेस्ट
  • इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम (EEG)
  • टोमोग्राफी
  • FMRI
  • पोजीट्रान एमिशन टोमोग्राफी (PET)
  • सिंगल-फोटॉन-इमिजन-कंप्यूटराइज्ड

मिर्गी का इलाज कैसे किया जाता है? – How is Epilepsy Disease Treated?

मिर्गी की बीमारी में राहत की प्राप्ति के लिए दवा बनाने वाली कंपनियों ने कई दवाएं तैयार की है जिसका इस्तेमाल रोगी की अवस्था के ऊपर आधारित होता है। एपिलेप्सी कई प्रकार की होती हैं परंतु हर प्रकार की एपिलेप्सी में एपिलेप्सी की दवा तकरीबन 70 परसेंट तक काम करती है। एपिलेप्सी का दूसरा इलाज यह है कि अगर टेस्ट में यह बात सामने निकल कर के आती है कि आपके दिमाग के किसी हिस्से में कोई ऐसे कारक हैं,

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जो मिर्गी के दौरे लाने के लिए जिम्मेदार हैं, तो डॉक्टर सर्जरी करके आप के दिमाग के हिस्से में मौजूद उस कारक को निकाल देता है। इससे आपको मिर्गी की समस्या से धीरे-धीरे आराम मिलने लगता है। हालांकि इस प्रकार की सर्जरी आपको एक्सपर्ट और प्रोफेशनल डॉक्टर से ही करवानी चाहिए।

मिर्गी में कौन सी दवा का प्रयोग किया जाता है? – Which medicine is used in epilepsy?

  • Carbamazepine
  • Eslicarbazepine (Aptiom)
  • Ethosuximide (Zarontin)
  • Gabapentin (Neurontin)
  • Lacosamide (Vimpat)
  • Phenobarbital
  • Phenytoin (Dilantin, Phenytek)
  • Pregabalin (Lyrica)

मिर्गी की बीमारी ठीक कैसे होती है? – How Epilepsy can be Cured

मिर्गी की बीमारी को ठीक करने में समय लगता है। यह समय 6 महीने का भी हो सकता है या फिर 1 साल से लेकर के 2 साल तक का भी हो सकता है। मिर्गी की बीमारी को ठीक करने के लिए कई दवाएं बनाई गई है, जिसकी जानकारी आपको आर्टिकल में दी गई है। इसके अलावा अगर मिर्गी की प्रॉब्लम दिमाग में पैदा हुई किसी समस्या के कारण है तो उसकी सर्जरी करवाई जा सकती है जिससे मिर्गी की समस्या ठीक हो सकती है।

मिर्गी के नुकसान – Side Effects of Epilepsy

मिर्गी के शारीरिक नुकसान तो है ही, साथ ही यह सामाजिक नुकसान भी करवाती है। इसके संभावित नुकसान कौन-कौन से हैं, इसकी जानकारी नीचे आपको दी गई है।

  • मुंह से बदबू आती है।
  • समाज में मान सम्मान घटता है।
  • लोग इज्जत नहीं करते हैं।
  • कभी भी बेहोश होकर गिरने का भय रहता है।• अत्याधिक टेंशन होने लगती है।
  • रिश्ते आने मे भी समस्या होती है‌।

मिर्गी आने पर क्या होता है?

किसी भी इंसान को एपिलेप्सी कब आ सकती है इसका कोई भी समय तय नहीं होता है। यह दिन या रात कभी भी आ सकती है। आमतौर पर एपिलेप्सी तब आती है, जब दिमाग की नसों पर अत्याधिक दबाव पड़ता है। इसमे पहले तो आदमी अपनी सुध बुध खो देता है और उसके बाद वह अचानक से ही जमीन पर गिर जाता है और फिर उसके हाथ और पैरों में जकड़न होने लगती है और वह हिलने लगता है।

कई लोगों को लगता है कि उसे बिजली का करंट लगा है परंतु जिस प्रकार बिजली का करंट लगने पर आदमी तड़पता है उसी प्रकार मिर्गी का दौरा आने पर भी आदमी तड़पता है। इसमें मुंह से झाग भी निकलने लगती है।

मिर्गी (Epilepsy) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या ज्यादा टेंशन लेने से मिर्गी की बीमारी हो सकती है?

जी हा

मिर्गी का दौरा पड़ने पर क्या होता है?

आदमी जमीन पर गिर जाता है और तड़पने लगता है।

क्या मिर्गी का दौरा आने पर शरीर की मांसपेशियों में ऐंठन भी होती है?

जी हां बिल्कुल

मिर्गी का दौरा आने पर क्या करना चाहिए?

तुरंत ही पेशेंट के ऊपर पानी के छींटे मारने चाहिए और डॉक्टर के पास ले करके जाना चाहिए।

क्या मिर्गी की बीमारी ठीक हो सकती है?

जी हां उचित इलाज करने पर यह ठीक हो जाती है।

हमें मिर्गी की बीमारी ना हो, इसके लिए क्या करना चाहिए?

आपको दिमाग पर ज्यादा प्रेशर नहीं देना चाहिए।

मिर्गी की प्रॉब्लम होने का सबसे मुख्य कारण क्या है?

अत्याधिक दिमागी टेंशन लेना

मिर्गी की आयुर्वेदिक दवा कौन सी है?

अश्वगंधा, ब्राह्मी, शंखपुष्पी, मुलेठी

मिर्गी की एलोपैथिक दवा कौन सी है?

ब्रीवरसेटम

एपिलेप्सी को हिंदी में क्या कहा जाता है?

मिर्गी

निष्कर्ष

आज के इस लेख में आपने जाना की मिर्गी कैसे आती है? और मिर्गी के लक्षण और उपाय (Epilepsy in Hindi) इस लेख को पूरा पढ़ने के बाद भी अगर आपके मन में epilepsy kya hota hai को लेकर कोई सवाल उठ रहा है तो आप नीचे Comment करके पूछ सकते हैं। हमारी विशेषज्ञ टीम आपके सभी सवालों का जवाब देगी।

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